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धूमल की हार और गुजरात के नतीजो के बाद अब भाजपा मुख्यमंत्रियों के नाम को लेकर दुविधा में !!

by Khabar7 - 19-Dec-2017 | 11:11:45
धूमल की हार और गुजरात के नतीजो के बाद अब भाजपा मुख्यमंत्रियों के नाम को लेकर दुविधा में !!

19 दिसंबर 2017,

अहमदाबाद//\नई दिल्ली !!

गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावों में भाजपा को जीत तो मिल गयी लेकिन दोनों ही राज्यो में सीएम को लेकर पार्टी पेशोपेश में है अब माथापच्ची इसी को लेकर है. अब पार्टी के सामने अगली चुनौती है, जीते गए राज्यो के मुख्यमंत्री तय करने की| पार्टी इन राज्यो की बागडोर किसी ऐसे को देना चाहती है जो जीते हुए विधायकों का भरोसा तो हासिल करे ही, साथ में 2019 के लोकसभा चुनावो के लिए भाजपा के हाथ भी मज़बूत कर सके| 

भाजपा ने चुनाव लड़ने से पहले ही हिमाचल में प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया था लेकिन धूमल तो हमीरपुर की सुजानपुर सीट पर अपना ही चुनाव हार बैठे| वहीं गुजरात में भाजपा के अगुआ थे सीएम रूपाणी, गुजरात भाजपा जीत तो गयी लेकिन सभी जानते है कि ये जीत भी मोदी के कुछ बचे हुए भरोसे का ही नतीजा है की पार्टी की साख बच गयी| 

गुजरात के नतीजो ने ये साबित कर दिया कि रुपाणी की पकड़ गुजरात में कमज़ोर हुई है,. यही वजह है कि दोनों ही राज्यो में सीएम पद के दावेदारों का दावा ही कमजोर पड़ गया|  चुनावी नतीजों के बाद आनन-फानन में भजपा संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई गई, और मुख्यमंत्री का नाम तय करने के लिए दोनों जगहों पर ऑब्ज़र्वर नियुक्त कर दिए गए, ये अलग बात है कि मुख्यमंत्री मोदी की पसंद का ही होगा और वो नाम मोदी ही सुझाएँगे|

चुनाव हारने के बाद धूमल और गुजरात हारते-हारते बचे यानी किनारे की मिली जीत के बाद रूपणी भी समझ गये होंगे कि उनका दावा जो चुनाव से पहले काफ़ी मजबूत था, वो नतीजो के बाद कमजोर पड़ चुका है उनके पास भी अब संसदीय बोर्ड से नियुक्त हुए ऑब्ज़र्वर्स के फ़ैसले के इनजार के अलावा कोई चारा नहीं है|.

कौन-कौन हैं गुजरात की गद्दी के दावेदार !

नए नामों में स्मृति ईरानी सबसे आगे ! 
सूत्रों की मानें तो भाजपा गुजरात में सीएम का चेहरा बदलने जा रही है. नए नामों में कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी का नाम सबसे आगे चल रहा है. स्मृति ईरानी के पक्ष में संगठन क्षमता और गुजराती भाषा में माहिर होना जाता है|

 मनसुख मांडविया है दूसरे सबसे मजबूत दावेदार !
दूसरे नंबर पर केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग और शिपिंग के राज्यमंत्री मनसुख मांडविया का नाम चल रहा है. मांडविया पाटीदार तो हैं ही, साथ में किसान भी हैं. ज़मीनी नेताओं में उनका नाम शुमार किया जाता है|

वजुभाई वाला का नाम भी चर्चा में !
तीसरा नाम वजुभाई वाला का है, जो क्षत्रिय समाज से एक मज़बूत नाम हैं. फिलहाल वो कर्नाटक के गवर्नर हैं, लेकिन संगठन के बारे में उनकी अचूक जानकारी और सौराष्ट्र में मज़बूत पकड़ उन्हें राज्य में लौटा सकती है. ज़ाहिर है बीजेपी के सामने 2019 का रण है और वो किसी भी कीमत पर गुजरातियों को और नाराज़ करने का जोखिम नहीं ले सकती.

धूमल की हार से कई नेताओं की उम्मीदें आसमान पर !

हिमाचल में जय राम ठाकुर मुखिया सबसे मजबूत   !
धूमल की हार ने कई बीजेपी नेताओं की उम्मीदें आसमान पर पहुंचा दी हैं. सूत्र बता रहे हैं कि धूमल की जगह पार्टी जिन चेहरों को हिमाचल की कुर्सी पर बैठाने पर विचार कर रही है उसमें सबसे पहला नाम जय राम ठाकुर का है. वो पूर्वमंत्री तो रहे ही हैं, साथ में उन्होंने हिमाचल में बतौर बीजेपी अध्यक्ष भी काम किया है. ठाकुर को कल ही दिल्ली से बुलावा भी मिला है|

हार के बाद भी पार्टी जाता सकती है धूमल पर भरोसा !
दुविधा हिमाचल में और भी ज़्यादा है. प्रेम कुमार धूमल अपने ही पुराने सहयोगी और बागी बनकर कांग्रेस में पहुंचे राजिन्दर राणा से हमीरपुर की सीट पर मात खा गए. तीसरी बार सीएम बनने का उनका सपना अब चकनाचूर होता दिख रहा है. वैसे धूमल ने अपनी हार को पार्टी की जीत के सामने बहुत छोटा बना दिया. इस हार के बाद प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि व्यक्तिगत हार मायने नहीं रखती, पार्टी की जीत हुई.

अजय जामवाल का नाम भी चर्चा में ! 
दूसरा नाम जो चर्चा में है वो है आरएसएस के प्रचारक अजय जामवाल का. जामवाल मंडी इलाके से ताल्लुक रखते हैं. यहां हरियाणा में खट्टर को सीएम बनाने की तरह का प्रयोग जामवाल के लिए किया जा सकता है. हालांकि, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के नाम पर भी गौर किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि पीएम मोदी की पसंद नड्डा को पिछले दिनों काफी प्रमोट किया गया था, लेकिन ऐन वक्त पर पार्टी ने धूमल का नाम आगे कर दिया. बावजूद इसके राज्य में मोदी और शाह की रैली का सफल आयोजन नड्डा ही करा रहे थे.

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