पूर्वांचल और अवध में होगा भाजपा-सपा के साथियों का असली इम्तिहान, किसकी नैया पार लगाएंगे OBC वोटर?

हाईलाइट्स –
सभी चरणों में भाजपा-सपा के OBC सहयोगियों की असली परीक्षा !
पिछड़े वर्ग के कई नेताओं के कंधो पर बड़ी जिम्मेदारी !
अनुप्रिया पटेल के लिए भी बड़ी चुनौती !

पूर्वांचल !!
उ.प्र. विधान सभा चुनाव में इस बार कई नेता ऐसे हैं जो पिछले चुनाव में भाजपा के साथ चल रहे थे, लेकिन इस बार वो पाला बदलकर वो साइकिल पर सवार हो गए है. इस कारण यह माना जा रहा है कि, इस बार पूर्वांचल और अवध में अपना दल एस की अनुप्रिया पटेल, निषाद पार्टी के संजय निषाद, सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान जैसे पिछड़े वर्ग के चेहरों के सहारे डैम में असली परीक्षा होगी|

यूपी विधानसभा चुनाव की जंग अब अवध और पूर्वांचल की जमीन पर पहुंच रही है. चौथे, पांचवें, छठे और सातवें चरण में पूर्वांचल और अवध में मतदान होना है. इन सभी चरणों में भाजपा और समाजवादी पार्टी के OBC सहयोगियों की असली परीक्षा होनी है. दरअसल, इस चरण में पिछड़े वर्ग के कई नेताओं के कंधो पर की जिम्मेदारी है कि वे अपने-अपने बड़े सहयोगी भाजपा और सपा की नैया पार करवाएं. इनमें से कई नेता ऐसे हैं जो अब पाला बदलकर साइकिल पर सवार हो चुके है इनमे सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान जैसे पिछड़े वर्ग के मुख्य चेहरे है इसलिए माना जा रहा है कि इस बार पूर्वांचल और अवध में अपना दल एस की अनुप्रिया पटेल, निषाद पार्टी के संजय निषाद, सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान जैसे पिछड़े वर्ग के चेहरों की असली परीक्षा होगी|

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बसपा से अपनी राजनीति शुरू करने वाले ओमप्रकाश राजभर ने 2002 में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का गठन किया. इसके बाद उन्होंने कई चुनाव लड़े, लेकिन खाता खुला 2017 में जब उन्होंने भाजपा से गठबंधन किया. 2022 में राजभर ने भाजपा को हराने के लिए सपा के साथ गठबंधन क्र लिया है.

ओमप्रकाश राजभर पिछड़ी जातियों जैसे बिंद, कुम्हार, प्रजापति, कुशवाहा और कोइरी की राजनीति करते हैं. सपा ने उन्हें 18 सीटें दी हैं. ओमप्रकाश राजभर के साथ ही उनके बेटे अरविंद राजभर भी मैदान में हैं. बेटे अरविंद राजभर वाराणसी की शिवपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. उनका मुकाबला योगी सरकार में मंत्री अनिल राजभर से है. एक ही जाति से होने की वजह से अरविंद राजभर की राह आसान नहीं होगी. वहीं राजभर खुद जहूराबाद से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां उन्हें त्रिकोणीय टक्कर मिल रही है. भाजपा के कालीचरण राजभर और बसपा की शादाब फातिमा ने उन्हें त्रिकोणीय मुकाबले में फंसा लिया है|

अपना दल एस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल पूर्वांचल में कुर्मी वोट बैंक का सर्वमान्य चेहरा हैं. पूर्वांचल की राजनीति में कुर्मी वोटर्स की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है. 2017 के चुनाव में अपना दल ने भाजपा के साथ मिलकर 11 सीटों पर चुनाव लड़ा था. उसके 9 प्रत्याशी विजयी रहे थे. इस बार अपना दल को बीजेपी ने 17 सीटें दी हैं. लिहाजा अनुप्रिया पटेल की चुनौती भी बड़ी है कि वह कुर्मी बाहुल्य सीटों पर भाजपा गठबंधन को जिताएं|

निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद इस बार भाजपा गठबंधन के साथ मैदान में हैं. निषाद जाति का नेतृत्व करने वाले संजय निषाद का बड़ा दावा है कि प्रदेश की 403 सीटों में से 160 पर निषादों का प्रभाव है. 2017 में निषाद पार्टी ने अपने सिंबल पर 72 उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सिर्फ ज्ञानपुर सीट पर ही जीत मिली. यह भी कहा जाता है कि ज्ञानपुर सीट से विजय मिश्रा की जीत पार्टी की नहीं उनकी खुद की थी. इस बार भाजपा ने उन्हें 16 सीटें दी हैं. अब उनके दावों की परीक्षा छठे और सातवें चरण में होगी.

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