राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, पुनर्विचार तक दर्ज नहीं होगा नया मुकदमा !!

हाईलाइट्स –
सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून पर रोक लगाई !
पुनर्विचार तक नहीं दर्ज होगा कोई नया केस !
जुलाई के तीसरे हफ्ते में होगी मामले की सुनवाई !

नई दिल्ली !!
सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून पर पुनर्विचार तक इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से कहा है कि पुनर्विचार तक राजद्रोह कानून यानी 124ए के तहत कोई नया मामला दर्ज न किया जाए. अब इस मामले की सुनवाई 3 जुलाई को होगी|

राजद्रोह कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई. इस दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि हमने राज्य सरकारों को जारी किए जाने वाले निर्देश का मसौदा तैयार किया है. उसके मुताबिक राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश होगा कि बिना जिला पुलिस कप्तान यानी एसपी या उससे ऊंचे स्तर के अधिकारी की मंजूरी के राजद्रोह की धाराओं में FIR दर्ज नहीं की जाएगी. इस दलील के साथ सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से कहा कि फिलहाल इस कानून पर रोक न लगाई जाए|

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सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को ये भी बताया कि पुलिस अधिकारी राजद्रोह के प्रावधानों के तहत FIR दर्ज करने के समर्थन में पर्याप्त कारण भी बताएंगे. उन्होंने कहा कि कानून पर पुनर्विचार तक वैकल्पिक उपाय संभव है. आंकड़ों की बात पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ये तो जमानती धारा है, अब सभी लंबित मामले की गंभीरता का विश्लेषण या आकलन कर पाना तो मुश्किल है. लिहाजा ऐसे में कोर्ट अपराध की परिभाषा पर रोक कैसे लगा सकती है? यह उचित नहीं होगा. जबकि याचिकाकर्ताओं की तरफ से दलील रखते हुए वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से मांग की है कि राजद्रोह कानून पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत है|

इससे पहले मंगलवार की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट कानून की वैधता के मसले को आगे विचार के लिए बड़ी बेंच को भेजता है तो कोर्ट इस बीच कानून के अमल पर रोक लगा दे. बता दें कि अभी तीन जजों की बेंच राजद्रोह कानून की वैधता पर सुनवाई कर रही है. इस बेंच में चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली शामिल हैं|

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वहीं, इस मामले में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि सरकार ने राजद्रोह कानून पर पुनर्विचार और उसकी पुन: जांच कराने का निर्णय लिया है. केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया है कि वो राजद्रोह कानून की धारा 124A की वैधता पर फिर से विचार करेगी. लिहाजा, इसकी वैधता की समीक्षा किए जाने तक इस मामले पर सुनवाई न करे|

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