जिलाधिकारी खुद जिस विभाग के उपाध्यक्ष, उसकी जमीन भू-माफियाओं के चंगुल से नहीं हो पा रही खाली !!

 
हाइलाइट्स –
अब तक बदल चुके हैं 4 जिलाधिकारी लेकिन जमीन नहीं हो सकी खाली !
पीतल नगरी स्थित धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र के 31 आवासो पर अवैध कब्जा !
आंखें बंद करके बिजली विभाग ने कनेक्शन जारी कर दिए !
सरकारी संपत्ति पर प्रधानमंत्री आवासीय योजना के तहत ऋण जारी !

मुरादाबाद !!
महानगर के पीतल नगरी सरकारी आवासों पर कब्जे का बड़ा मामला सामने आया है महानगर के स्थित धातु हस्तशेप सेवा केंद्र के आवासों पर थोक में कब्जा हो गया है। मुरादाबाद के पीतल उद्योग एवं निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुरादाबाद में कपड़ा मंत्रालय के अधीन ब्रासवेयर  कारपोरेशन की स्थापना की गई थी। निर्यातकों को प्रशिक्षण एवं धातु उत्पादों पर लेकर पोलिश व अन्य की सुविधाओं हेतु ब्रासवेयर कारपोरेशन के अधीन धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र की स्थापना की गई थी और इसके परिसर का निर्माण पीतल नगरी में किया गया था। आगे चलकर यह केंद्र ब्रासवेयर कारपोरेशन से अलग कार्य करने लगा।

अलग होते समय धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र को पीतल नगरी का संपूर्ण कार्यालय परिसर एवं इस परिसर के नजदीक ही बने 35 आवास सरकार द्वारा आवंटित किए गए थे। यह आवास धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र में कार्य करने वाले प्रशिक्षण विद्यार्थियों एवं अन्य कर्मचारियों के लिए बनाए गए थे। ये आवासो पर कई सालों से भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जे होते चले गए वर्तमान में इस केंद्र के 35 आवासों में से 31 पर भू-माफियाओं का अवैध कब्जा है। हैरानी की बात तो यह है कि, हस्तशिल्प केंद्र के महाप्रबंधक द्वारा अनेकों बार इन अवैध कब्जों को लेकर शिकायती पत्र जिले के सभी आला अधिकारियों को कई बार लिखे जा चुके हैं। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका है।

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अवैध कब्जेदारों को जारी हो गए विद्युत कनेक्शन !
हालात तो यह है कि, इन कब्जाए गए 31 आवासों में से अधिकांश पर बिना किसी कागजी जांच-पड़ताल के विद्युत कनेक्शन भी जारी कर दिए गए। धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र के महाप्रबंधक रविंद्र कुमार शर्मा के अनुसार इनमें से 19 कनेक्शन तो 2017 में उस समय के एसडीओ की अनुमति से जारी किए गए धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र के महाप्रबंधक रविंद्र कुमार शर्मा के बताते हैं कि, कपड़ा मंत्रालय के अधीन कार्य कर रहे इस धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र के पदेन सदस्य जिला अधिकारी भी हैं  जिलाधिकारी इस धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र के वाइस चेयरमैन/उपाध्यक्ष हैं जबकि सेवा केंद्र के अध्यक्ष/ निदेशक दिल्ली स्थित कार्यालय में बैठते हैं।

चार जिलाधिकारी बदले लेकिन नतीजा नहीं निकला !
गौरतलब है कि इन अवैध कब्जों के बारे में सूचना देने और उन्हें खाली कराने के लिए भेजी गई चिट्ठियों व प्रार्थना पत्रों का सिलसिला 2014 में मुरादाबाद के जिलाधिकारी रहे दीपक अग्रवाल के बाद सोहेल बिन सगीर और फिर राकेश कुमार सिंह से होता हुआ वर्तमान में जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार सिंह तक आ पहुंचा है।

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खबर के अनुसार वर्तमान जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह द्वारा 31-12-2020 को इस मामले में अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम एवं पुलिस क्षेत्राधिकारी कठघर की सह अध्यक्षता  में एक समिति का गठन कब्जा हटाने के लिए किया था। समिति में उपरोक्त दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के अतिरिक्त धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र के इलेक्ट्रोप्लेटिंग फोरमेन और थाना कटघर के प्रभारी निरीक्षक को भी शामिल किया गया था। डेढ़ साल बीतने के बाद भी अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम और क्षेत्राधिकारी कटघर उपरोक्त आवाजों से अवैध कब्जा नहीं हटा सके हैं।

अवैध कब्जेदारों को प्राप्त है, राजनीतिक संरक्षण !
जानकारी मिली है कि, मामले में अवैध कब्जेदारों को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है। जानकारी के अनुसार शिवसेना के प्रदेश उप प्रमुख विपिन भटनागर द्वारा जिला अधिकारी को एक पत्र भेजकर अवैध कब्जेदारों को गरीब और असहाय बताकर इन आवासों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की कार्रवाई के  का विरोध किया था। पत्र के प्रतिवेदन के रूप में धातु सेवा केंद्र के महाप्रबंधक द्वारा 10 फरवरी 2021 को अपर नगर मजिस्ट्रेट के समक्ष शिवसेना प्रदेश उप प्रमुख की बात को गलत बताते हुए अपना पक्ष अपर नगर मजिस्ट्रेट के समक्ष  रखा था। हैरानी की बात है कि आखिर शिवसेना उप प्रदेश प्रमुख ने किस आधार पर अवैध कब्जेदारों का पक्ष लिया।

डूडा द्वारा सरकारी संपत्ति पर दे दिया गया आवासीय लोन !
सरकारी विभागों द्वारा इन अवैध कब्जे को काले करने की कार्यवाही अभी शुरू भी नहीं हुई है कि, इसी बीच प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मुरादाबाद परियोजना अधिकारी डूडा कार्यालय की तरफ से अवैध कब्जेदारों को इस सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे के बावजूद लोन भी उपलब्ध करा दिया।

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सरकारी आवासों पर लोन उपलब्ध कराए जाने के संबंध में भी धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र के महाप्रबंधक द्वारा परियोजना अधिकारी डूडा मुरादाबाद को पत्र भेजकर लोन दिए जाने के संबंध में 2 दिसंबर 2020 को आपत्ति दर्ज कराई थी।  लेकिन इस मामले में भी डूडा परियोजना कार्यालय और इससे जुड़े अधिकारियों द्वारा इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया गया। गलत तरीके से लोन दिए जाने के मामले में भी कोई संज्ञान नहीं लिया गया और सभी अवैध कब्जेदारों पर वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास योजना का कर्ज है। सरकारी संपत्ति पर लोन उपलब्ध कराने को लेकर डूडा से जुड़े अधिकारी भी सवालों के घेरे में हैं। सवाल यह है इन सरकारी आवासों पर बिना किसी दस्तावेजों के आखिर डूडा कार्यालय ने किस दबाव में और कैसे प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लोन उपलब्ध करा दिया।

17 माह बाद भी नहीं दर्ज हो सकी FIR !
मिली जानकारी के अनुसार सरकारी आवासों पर हुए इस कब्जे के मामले में धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र के महाप्रबंधक द्वारा 15 दिसंबर 2020 को थाना कटघर में भी, एक पत्र के जरिए अवैध कब्जे की जानकारी देते हुए इन्हें खाली कराने का प्रार्थना पत्र दिया था।  इस पत्र की प्रतिलिपि मंडलायुक्त, जिलाधिकारी पुलिस कप्तान अपर जिला अधिकारी, उप जिलाधिकारी सदर सहित तहसीलदार सदर को भी भेजी गई थी, लेकिन कटघर थाने में आज तक इस सरकारी संपत्ति पर कब्जों के खिलाफ FIR तक दर्ज नहीं हो सकी है। गौरतलब है कि, योगी राज में अन्य जिलों में भूमाफियाओं द्वारा कब्जाई गई सम्पत्तियाँ मुक्त करवाई जा रही हैं लेकिन, मुरादाबाद में इन सरकारी आवास, वो भी जिस विभाग के खुद जिलाधिकारी उपाध्यक्ष है, को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए अभी तक कोई ठोस प्रयास नहीं किये गए।

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