वीजा भ्रष्टाचार मामला : लंबी पूछताछ के बाद कार्ति चिदंबरम का करीबी गिरफ्तार !!

हाईलाइट्स –
कार्ति चिदंबरम के ठिकानों पर कल हुई थी छापेमारी !
कार्ति चिदंबरम पर रिश्वत लेने के लगे आरोप !

नई दिल्ली !!
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम के एक करीबी को CBI ने अरेस्ट कर लिया है. यह एक्शन कल हुई छापेमारी के बाद लिया गया है. जानकारी के मुताबिक, कार्ति चिदंबरम के करीबी भास्कर रमण को लंबी पूछताछ के बाद CBI ने गिरफ्तार किया है. उनपर घूस लेने और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं|

आपको बता दें कि, कार्ति चिदंबरम के 9 ठिकानों पर कल छापेमारी हुई थी. यह एक्शन चीन से जुड़े एक मामले पर हुआ था. इसी में अब भास्कर रमण की गिरफ्तारी भी हुई है. लोकसभा सांसद कार्ति चिदंबरम के खिलाफ CBI ने मंगलवार को एक नया मामला दर्ज किया था. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति पर आरोप है कि उन्होंने 250 चीनी नागरिकों को भारतीय वीजा दिलाया, जिसके बदले उन्होंने 50 लाख की रिश्वत ली. CBI टीम ने मंगलवार को कार्ति चिदंबरम के घर और ऑफिस समेत 9 ठिकानों पर छापे मारे थे. ये छापेमारी चेन्नई, दिल्ली आदि में की गई थी. मुंबई के तीन ठिकानों, कर्नाटक के एक और पंजाब और ओडिशा के एक-एक ठिकाने पर भी CBI की रेड पड़ी थी|

यह भी पढ़ें :- राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, पुनर्विचार तक दर्ज नहीं होगा नया मुकदमा !!

जिस मामले में CBI ने नया केस दर्ज किया है, उस मामले में जांच पहले से चल रही थी. CBI का आरोप है कि कार्ति चिदंबरम ने UPA के कार्यकाल में 250 चीनी नागरिकों को वीजा दिलाया, जिसके बदले 50 लाख रुपये की रिश्वत उनको मिली. CBI के मुताबिक, ये चीनी नागरिक किसी पावर प्रोजेक्ट के लिए भारत आकर काम करना चाहते थे. आरोप है कि ऐसा 2010 से 2014 के बीच हुआ था. शुरुआती जांच के बाद इस मामले में CBI ने FIR दर्ज कर ली थी. कार्ति चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने अतिरिक्त चीनी वर्कर्स को गैरकानूनी ढंग से वीजा दिलाने में मदद की थी. ये लोग पंजाब के मनसा में मौजूद थर्मल पावर प्लांट में काम करने आए थे. चीनी कंपनी Shandong Electric Power Construction Corp (SEPCO) इसका काम देख रही थी|

जानकारी के मुताबिक, प्रोजेक्ट तय वक्त से पीछे चल रहा था. कार्रवाई से बचने के लिए Talwandi Sabo Power Limited अतिरिक्त चीनी कर्मचारियों को वहां लाना चाहती थी. लेकिन वीजा सीलिंग की वजह से ये कर्मचारी नहीं आ पा रहे थे. फिर कंपनी ने कार्ति से बात की और कथित रूप से उन्होंने बैक डोर एंट्री का तरीका बताया. कार्ति के कहने पर तब गृह मंत्रालय ने अप्लाई करने के एक महीने के अंदर वीजा दे दिया था. आरोप है कि इसके लिए फर्जी रसीदों से कार्ति को करोड़ों की पेमेंट हुई थी|

यह भी पढ़ें :- दिल्ली : द्वारका में गरजा बुलडोजर, सीलमपुर में भी ध्वस्त होंगे अवैध निर्माण !!

CBI को INX media केस की जांच के वक्त इस बात का पता चला था. INX media केस में भी कार्ति का नाम है, जिसमें उनके खिलाफ जांच चल रही है. Foreign Investment Promotion Board (FIPB) क्लीयरेंस को लेकर यह जांच चल रही है. जांच के दौरान CBI को 50 लाख रुपये के लेनदेन का पता चला था. आरोप है कि यह वही पैसा था जो कि चीनी कर्मचारियों को वीजा दिलाने के बदले गैरकानूनी ढंग से मिले थे|

Pinterest
LinkedIn
Share
Telegram
WhatsApp